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  • Lafzon Ka Ingan

    Lafzon Ka Ingan

    Maaz Ahmad Khan|1

    मिट्टी प्रयागराज की,

    आँखों में आसमान,

    किताबों में Biology,

    दिल में नया जहान।

    कंधों पे सपने भारी,

    फिर भी कदम हल्के,

    जहाँ लोग रुक जाते हैं,

    वहीं से हम चल

    पड़ते।

    कलम उठी तो शेर हुए,

    तार जुड़े तो मशीन,

    एक तरफ़ ये दिल शायर,

    दूजी तरफ़ स्क्रीन।

    लफ़्ज़ों से भी जंग लड़ी,

    कोड से भी खेल,

    रास्ते चाहे मुश्किल हों,

    इरादे रहें steel। कभी काग़ज़ पर ख़्वाब मिले,

    कभी circuits में जान,

    छोटी-सी मेरी दुनिया में

    बड़ी-बड़ी उड़ान। ना कोई नक्शा पूरा था,

    ना कोई रास्ता तय,

    जो मिला

    उसी से बनता गया

    मेरा अपना way।

    मैं लफ़्ज़ों का इंजन हूँ,

    सपनों की उड़ान हूँ,

    कल का इंतज़ार नहीं— आज का तूफ़ान हूँ। मैं गिरकर भी चलता

    हूँ, थककर भी मुस्काता हूँ,

    दुनिया जो सोच न पाए,

    वो सोच के दिखाता हूँ। मेरे हाथ में कलम भी है,

    मेरे हाथ में code,

    दिल में पूरा आसमान है,

    और आँखों में road।

    कभी bike पे शहर नापा,

    कभी ख़्वाबों के साथ,

    चालीस किलोमीटर भी क्या,

    जब मंज़िल हो पास। कभी fire से लड़ती मशीन,

    कभी आँखों के लिए light,

    कभी AI से दोस्ती,

    कभी future की flight।

    नाम बड़ा हो या ना हो,

    काम रहे पहचान, एक दिन मेरी सोच कहेगी— “हाँ,

    यही था वो इंसान।”

    मेरे हिस्से में आसानियाँ

    शायद थोड़ी कम,

    पर मुश्किल जितनी बढ़ती है,

    उतना बढ़ता दम।

    मैं लफ़्ज़ों का इंजन हूँ,

    सपनों की उड़ान हूँ,

    कल का इंतज़ार नहीं— आज का तूफ़ान हूँ। मैं गिरकर भी चलता

    हूँ, थककर भी मुस्काता हूँ,

    दुनिया जो सोच न पाए,

    वो सोच के दिखाता हूँ।

    किसी ने कहा—

    “पहले रास्ता ढूँढ।” मैंने कहा—

    “रास्ता बनाऊँगा।” किसी ने कहा— “तेरे पास कम है।” मैंने कहा— “जो

    है, उसी से दुनिया हिलाऊँगा।” किताबों से निकलकर

    machines तक जाना है,

    और machines से आगे इंसान तक जाना है। शायर भी रहना है,

    researcher भी बनना है,

    जो ख़्वाब लिखा था कल,

    उसे सच में बदलना है। मैं

    लफ़्ज़ों का इंजन हूँ,

    सपनों की उड़ान हूँ,

    मिट्टी से निकला हूँ लेकिन नज़र में आसमान हूँ। मेरे शब्द हथियार

    नहीं,

    मेरी पहचान हैं, मेरे ख़्वाब सिर्फ़ मेरे नहीं—

    ये मेरी उड़ान हैं। आज कहानी छोटी है,

    कल इसका नाम होगा,

    जिसने खुद से हार न मानी—

    एक दिन वही अंजाम होगा।

    कलम अभी भी चल रही,

    circuit अभी भी on,

    सफ़र अभी बाकी है—

    और मैं अभी भी gone?

    नहीं…

    मैं अभी कहाँ रुका हूँ।

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