

एक मुलाकात से शुरू हुई थी ये कहानी,
ये कहानी है पल्लवी
और रियाज कि दूर होकर भी तू लगती है मेरी ज़िंदगी की
रानी…
दो साल बीत गए,
फिर भी दिल यही कहता है,
पल्लवी…
तू ही है,
जिससे मेरा दिल ये कहता है…
एक ऐप के उस छोटे से जहाँ में,
मिला था तू
मुझे अनजाने में,
बातों-बातों में दिल दे बैठे,
कब प्यार हुआ,
समझ ना पाए हम।
तेरी हर एक बात याद आती है,
तेरी आवाज़ दिल को छू जाती है,
दूरियाँ चाहे कितनी भी हों हममें,
तेरी मोहब्बत पास बुलाती है।
पल्लवी… तू मेरी धड़कन है,
तू ही मेरी पहली चाहत है,
दो साल से तुझसे प्यार किया,
अब तुझसे मिलने की चाहत है। ना देखा तुझे अभी आँखों से,
फिर भी तेरा चेहरा दिल में है,
दूर सही तू मुझसे लेकिन,
हर पल तू मेरे दिल में है।
रातों में तेरी बातें होती हैं,
खामोशी में भी मुलाकातें होती हैं,
फोन की उस छोटी सी स्क्रीन पर,
हमारी दुनिया की शुरुआतें होती हैं। कभी हँसना,
कभी रूठ जाना,
फिर प्यार से तुझे मनाना,
इन छोटी-छोटी बातों ने ही,
सिखाया मुझको प्यार निभाना।
एक दिन वो शाम भी आएगी,
जब तू मेरे सामने मुस्कुराएगी,
जिसे ख्वाबों में देखा है मैंने,
वो हकीकत बनकर मेरे पास आएगी। उस दिन ना कोई दूरी होगी,
ना मिलने की कोई मजबूरी होगी,
बस तू होगी, मैं होऊँगा,
और हमारी मोहब्बत पूरी होगी।
पल्लवी… तू मेरी धड़कन है,
तू ही मेरी पहली चाहत है,
दो साल नहीं, पूरी ज़िंदगी,
अब तेरे साथ बिताने की चाहत है। दूरियों से प्यार कम नहीं
होता, सच्चा प्यार कभी खत्म नहीं होता,
तू मेरी है, ये दिल कहता है,
तेरे बिना ये दिल कहीं नहीं रहता है।
एक दिन मिलेंगे हम दोनों,
ये वादा दिल ने किया है…
दो साल की इस मोहब्बत को,
ज़िंदगी भर का
नाम देना है…