

हूँ…
हूँ… हू-हूँ…
हम्म्म…
हम्म्म…
धरती के दिल में बीज हैं कुछ,
बारिश आए तो जागें यें।
रूह के अंदर दीप हैं कुछ,
प्यार मिले तो जलते हैं।
धरती के नीचे चुप हैं सोए,
बारिश की राह निहारें यें।
दिल के अंदर ँधियारे कुछ,
प्यार से ही तो चमकें यें।
ंआज भी एक चुंबन को तरसूँ,
दिल के किनारे फूल खिला।
अनकहे मीठे-मीठे बोल,
होठों पर आकर रुक गए।
तुम भी देखूँ, मैं भी देखूँ,
बीच खामोशी बोल उठी।
खाली प्याला साथ में बाँटा,
फिर भी दिल की बात हुई।
बीज जूँ बारिश बिन उगते नहीं,
कुछ प्यार दिलों से छुपते नहीं। बुझने से जो लौ इनकार करे,
अंदर कुछ आग सदा धड़के। कुछ सपने बारिश माँगते हैं,
कुछ
दिल प्यार माँगते हैं। कुछ बातें ना कहना ही अछ्छा,
खामोशी में राजह् रहते हैं। तेरे मेरे बीछ जो चुप है,
उसमें अपनर प्यार बसा हैं। जिसे कहने की हिम्मत ना हुई,
वो दिल में आज बात हूई है।
वक़्त लहरों सा तकराता है,
किनारे आकर लौट जाता हैं।
रेत के इस नरम से दिल पर,
अपना प्यार लिख जाता हैं।
जब मालूम था दूर जाना,
फिर क्यों इतना सुंदर किया?
अब शाम भी उदास सी लगती,
जूं सूरज ने अलविदा कहा।
समंदर की धड़कन सुनता हूँ,
रात मुछे कुछ कहती हैं।
बारिश की बूँदें गिरती हैं,
तेरी याद मुछे
थामे हैं। शायद कुछ प्यार टुठे होते,
जो रोशनी तक आते नहीं। धरती के मीचे बीजों जैसे,
बारिश बिन भी
मरते नहीं।
बीज जैसे बारिश बिन उगते नहीं,
कुछ प्यार दिलों से छुपते नहीं। बुझने से
जो लौ इनकार करे,
अंदर कुछ आग सदा धड़के। कुछ सपने बारिश माँगते हैं,
कुछ दिल प्यार माँगते हैं। कुछ जुदाइयाँ शब्दों से बड़ी,
कुछ दर्द दिलों में रहते हैं।
भले ही राहें अलग हो गईं,
तेरा प्यार मेरे साथ हैं। जहाँ मेरा दिल आज भी भीगे,
वहीं तेरा
नाम
बसा हैं।
हम्म्म… हम्म्म…
हूँ… हूँ… हू-हूँ…
बीज जैसे बारिश से ऊगते हैं…
कुछ प्यार छोड़कर भी रहते हैं…