

रास्ते में रोशनी
तेरी
मुसकान हो गई
पहचान थी
न
तुझसे यों
पहचान हो गई
कितना मैं चला,
चलता रहा,
राह कठिन थी
देखा जो तुझे राह
वो आसान हो गई
अब तक तो उदासीन-सी थी
मुझसे ये दुनिया
जाने क्या हुआ आज
कदरदान हो गई (हम्म्म)
आई थी खुशी घर
मेरे
रहने के वास्ते
दो दिन के लिए हाय
वो
मेहमान हो गई
पल भर को नहीं चैन से सो पाया आदमी
सपनों से आज नींद परेशान हो गई
रोती रही
अकेली पड़ी
रागिनी इसकी
लोगों के स्वर मिले
तो वो
सहगान हो गई
(हाँ
हाँ) (हम्म्म)