

हम्म... ओ...
ओ... रात भी चुप है,
मैं भी ख़ामोश हूँ,
खुद से ही बिछड़ा,
खुद की तलाश में हूँ...
सड़कें हैं खाली, ये शहर सो रहा,
दिल मेरा जाने कहाँ खो रहा...
खिड़की से आती वो ठंडी हवा,
तेरी ही यादों का देती पता...
गाड़ी में धीमे वो नग़मे पुराने,
आँखों में ठहरे हैं किस्से सुहाने...
मंज़िल का मुझको पता भी नहीं,
तेरे बिना अब मैं मैं भी नहीं...
कुछ ख़्वाब थे जो अधूरे रहे,
कुछ अपने थे जो पराए हुए...
मैं हँसता रहा सबकी नज़र में,
अंदर से लेकिन हम टूटते रहे...
ये तन्हा सफर, ये तन्हा रातें,
तेरी कमी और तेरी ही बातें...
चलता हूँ मैं, पर दिल है वहीं,
जहाँ तू थी,
अब तू नहीं...
ये चाँद भी मुझसे सवाल करे,
क्यों दिल तेरा ही ख़याल करे...
मैं खो गया हूँ इन रास्तों में,
तेरा नाम है अब भी साँसों में...
सिग्नल पे रुककर मैं देखूँ तुझे,
हर अक्स में बस मैं ढूँढूँ तुझे...
शीशे पे बारिश की बूँदें गिरीं,
जैसे मेरी आँखें चुपके से भरीं...
वो मोड़ जहाँ हम मिला करते थे,
छोटी-सी बातों पे हँसा करते थे...
अब उस जगह से गुज़रता हूँ जब,
दिल पूछता है, तू मिलता है कब?
हम्म... हम्म... ओ... तेरी यादों में...
हम्म... हम्म... इस रात
में...
शायद कभी फिर सवेरा मिले,
दिल को मेरे भी किनारा मिले...
पर आज की रात बस इतना करूँ,
तेरी यादों को गीतों में भरूँ...
तुझे भूलना अब ज़रूरी नहीं,
हर दर्द की कोई दवा भी नहीं...
कुछ रिश्ते दिल में ही रहते हैं,
बिन साथ के भी अपने लगते हैं...
ये तन्हा सफर, ये तन्हा रातें,
तेरी कमी और तेरी ही बातें...
चलता हूँ मैं, अब रुकना नहीं,
तेरी याद है, पर झुकना नहीं...
ये चाँद भी अब गवाह बने,
दिल फिर से जीने की राह चुने...
मैं खोया था इन रास्तों में,
अब ख़ुद को
ढूँढूँगा
इन रातों में...
रात ढलेगी, सुबह भी होगी,
दिल की ज़मीं पर रोशनी होगी...
तू याद रहेगी, ये सच है मगर,
मैं चलता रहूँगा... तन्हा सफर...
हम्म... ओ...
ओ... तन्हा
सफर...
ख़ुद की तरफ़... एक नया
सफर...