

खामोशियाँ कहती हैं कहानी अधूरी
साँसों में
घुली है कैसी ये दूरी (हम्ममम)
वो बातें तुम्हारी,
वो यादें पुरानी
बिखरी हुई है
मेरी ज़िन्दगानी
तुम दूर
हो के भी पास
हो मेरे
यादों में बहते हैं साये अँधेरे
क्यों खो गए
वो हंसी
पल सुनहरे (आहाहा)
राहों में ढूँढू
तुम्हारे निशाँ को
कैसे
मनाऊँ
इस तन्हा
जहाँ को
तुम दूर
हो के भी पास
हो मेरे
यादों में बहते हैं साये अँधेरे
क्यों खो गए
वो हंसी
पल सुनहरे (ओहहो)
खो गए
कहाँ...