

(ommmm) अघोर पंथ, अघोर रीत काल से जिसकी ना कोई प्रीत श्मशान की
राख, माथे का ताज तीनों लोक में जोगी का राज लाल नेत्र,
और जटा विशाल
मस्तक पे जिसके
नाचे महाकाल!
बम-बम गूंजे, गूंजे नाद!
अलख निरंजन! आदि जुगाद!
आदेश! आदेश!
नव नाथों को आदेश!
मिट जाएं जनम-मरण के क्लेश!
आदेश! (आदेश!)
काया माया सब है धुंआ जोगी ने सत्य को है छुआ गोरख
जगावे भीतर की आग सोया हुआ रे चेतन अब जाग!
इड़ा, पिंगला, सुषुम्ना के पार ब्रह्म-रंध्र में शिव का द्वार!
खोल दे ताले, पी ले अमिय शिव के सिवा ना कोई है
प्रिय!
खप्पर धारी, त्रिशूल वान भैरव रूप,
शिव का ध्यान हुंकार भरे तो डोले दिशाएं पाप और कर्म सब
भस्म हो जाएं! ॐ क्रीं भद्रकाल्यै नमः!
ॐ ह्रीं अघोराय फट्!
छूटे मोह, टूटे भरम जोगी जाने एक ही धर्म— केवल शिव!
मैं ही शून्य, मैं ही अनन्त
मैं ही आरंभ, मैं ही हूँ अन्त
ना कोई मेरा, ना मैं किसी का भीतर बाजे डमरू उसी का!
डिम-डिम! डिम-डिम! डिम-डिम!
शब्द सांचा, पिंड काचा!
चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा!
अलख निरंजन! जागे गोरख,
भागे काल! आदेश! आदेश!
आदेश! स्वाहा!