

रातें थीं ख़ामोश, दिल में थी बात,
अहमद चला अकेला लेकर अपने जज़्बात। लोग बदलते रहे,
मौसम बदलते रहे, अहमद के सपने मगर कभी नहीं बदले।
जिसे अपना समझा, वो दूर हो गया,
हँसता हुआ चेहरा भी मजबूर हो गया। दिल ने कहा रुक जा,
वक्त ने कहा चल,
अहमद ने चुना अपना ही रास्ता हर पल। कुछ लोग मिले,
कुछ छोड़ गए, कुछ अपने होकर भी दिल तोड़ गए। लेकिन अहमद
ने हार नहीं मानी,
अपनी ही कलम से लिख दी नई कहानी।
अहमद…
तू बस चलता जा,
जो खो गया उसे भूलता जा। तेरा वक्त भी आएगा एक दिन,
बस अपने सपनों को थामता जा। अहमद… नाम तेरा याद रहेगा,
आज नहीं तो कल ये शहर कहेगा— ये लड़का अलग था,
ये दिल से जिया,
अहमद ने अपना मुकाम खुद लिया।
ना किसी से जलना,
ना किसी से डरना,
अपने ही दम पर
आगे बढ़ना। कल जो हँसे थे,
वो देखेंगे एक दिन,
अहमद का नाम चमकेगा सबसे ऊपर एक दिन।
माँ की दुआ और अपनों का प्यार,
इन्हीं के सहारे तय होगा सफ़र। दिल में मोहब्बत,
आँखों में ख़्वाब, अहमद की कहानी—थोड़ी सी लाजवाब।
कहानी अभी बाकी है,
सफ़र अभी जारी,
अहमद की दुनिया है
अपनी प्यारी। जो लिखा नहीं,
वो कल लिखेगा,
अहमद का नाम… हमेशा
दिल में रहेगा।