

सुलग रहा हूँ पर सुलगने का कोई सबब तो हो
मैं राख हो जाऊँगा पहले कोई आग गजब तो हो
अजीब है यह जिंदगी का सफर भी ऐ दोस्त (warm vocal) जहाँ
रायें तो मिलती है पर
कोई हमसफर तो हो
हम तो यूं ही बसर कर रहे हैं दिन अपने
कोई पूछे तो सही दिल में कोई हसरतें अदब तो हो (warm
harmonies)
सब कह रहे हैं कि बदल गए हैं अंदाज हमारे
उन्हें क्या पता बदलने के लिए कोई सबब तो हो
हम तो यूं ही बसर कर रहे हैं दिन अपने कोई पूछे
तो सही दिल में कोई हसरतें अदब तो हो
(warm ad-libs)
अब किसी से क्या गिला शिकवा करना
जब खुद से ही वास्ता ना रहा तो कोई अपना तो हो
हम तो यूं ही बसर
कर रहे हैं दिन अपने
कोई पूछे तो सही दिल में कोई हसरतें अदब तो हो
(warm vocal echoes)