

बचपन का वो साथ हमारा,
कब बना मेरी ज़िंदगी
मुझको खबर भी न लगी,
कब हो गई तुमसे बंदगी मैं मांगता रहा
तेरा प्यार हर घड़ी
तुम दूर रही, मैं रोता रहा
हर घड़ी (अहहह)
सालों तक तेरे पीछे यूँ ही दिल हारता रहा तू किसी और
को देखे, मैं दर्द संभालता रहा फिर एक दिन जब सही
न गई वो दूरियाँ
टूटा मेरा दिल,
रो उठी मेरी खामोशियाँ
तब तुमने थामा हाथ,
कहा—'हाँ, मुझे भी प्यार है' चार सालों के दर्द का वो मीठा
सा करार है साथ चले फिर
कुछ हसीं पल, लगा सब संभल
गया
पर किस्मत
का
लिखा देखो, पल में बदल गया
जल्दबाज़ी में उठाया जो एक कदम हमने रखा जो माँ के सामने
अपने प्यार का दायरा हमने एक ही पल में टूट गए सारे
सपने हसीन ज़माने ने छीन ली मेरी खुशियों की ज़मीन
(ओह
खुदाया)