

(कृष्ण...) देवकी के गर्भ से जन्मा,
वासुदेव ने यमुना
पार किया
नंद-यशोदा की गोद में पला
माखन चुराता फिरे, कान्हा नटखट,
कान्हा मासूम
हर घर शरारतें, मुस्कान से दिल पिघलाए (जय श्रीकृष्ण)
यमुना में कालिया नाग,
फन पे नाच
रचाया
इंद्र का अहंकार मिटाया,
गोवर्धन उठाकर सबको बचाया
राधा संग रास रची,
बाँसुरी की धुन से मोहित हुए,
वृंदावन में प्रेम बिखरा
जय श्रीकृष्ण,
जय श्रीकृष्ण,
कृष्ण कथा अमर है
प्रेम-भक्ति का सागर, राधा-कृष्ण का नाम जपो
यही
सार है,
जय श्रीकृष्ण
अक्रूर बुला लाए मथुरा,
कंस मारा,
द्वारका बसाई
रुक्मिणी
हर लाई, सुदामा आया,
रो पड़े कान्हा
मित्रता की मिसाल... (ओ कान्हा...)
कुरुक्षेत्र में
अर्जुन
संग,
गीता का ज्ञान सुनाया
कर्म करो,
फल की चिंता ना,
विश्वरूप दिखाया ब्रह्मांड बसा मुख में
(जय श्रीकृष्ण!)
द्वारका से विदा ली,
धाम गए कान्हा
गोकुल रोया, वृंदावन रोया,
सबके मन में बस गए,
लीला अमर रहेगी (कृष्ण...
कृष्ण... कृष्ण...)