

(ahhhh) राम
ने
सीता को वन भेजा,
प्रजा की बातों से विवश,
सीता वाल्मीकि आश्रम गईं,
वहाँ लव-कुश को
जन्म दिया।
जय राम,
जय सीता, उत्तरकांड का यह क्षण,
त्याग की मूरत,
प्रेम का बंधन,
लव-कुश की कहानी।
(हे राम)
लव-कुश बड़े हुए
वाल्मीकि के आश्रम में,
उन्हें रामायण की शिक्षा मिली,
वे राम के गुणों को गाने लगे,
उन्होंने अपने पिता के सामने रामायण
गाई।
लव-कुश ने
रामायण
गाया,
वाल्मीकि की शिक्षा पाई,
राम के सामने
गाना किया, राम अपनी
कथा
सुनकर भावुक हुए।
राम ने पहचाना
अपने पुत्रों को, उन्हें आशीर्वाद दिया,
लव-कुश ने राम को
प्रणाम किया,
सबने जयघोष किया।
(जय
सिया राम)
सीता फिर से वन गईं,
धरती माता
ने
उन्हें बुलाया,
सीता धरती में समा गईं,
राम अधूरे रह गए।
सीता का धरती में समाना,
राम का विरह,
रामायण का यह भावुक अंत,
राम-सीता का प्रेम अमर।
(जय सिया राम)