

सीता
कहाँ हो राम की,
जंगल-जंगल
भटकते राम
हर पेड़, हर नदी से पूछा,
क्या देखा
मेरी
सीता
को
तुमने?
(ओह
राम)
हाय राम,
हाय राम,
सीता के
बिना राम
विरह
का
दुख
सह
न पाये,
राम रोते हैं,
सीता को
पुकारते हैं (हाए)
राम का विलाप,
सारा वन सुनता,
सीता को पुकारते राम
पर सीता कहीं
नहीं थीं, लंका
में थीं वे
रावण के
चंगुल में
राम ने ठान लिया,
सीता को
ढूँढकर
रहेंगे
विरह का दुख सहेंगे,
पर धर्म का मार्ग न छोड़ेंगे (राम...)