

जटायु ने रावण
को
रोका
सीता को छुड़ाने की कोशिश
रावण
ने
पंख काट दिए
जटायु
अधमरा
हो
गया
(हाहाहा रावण हँसा)
जय जटायु, वीर पक्षीराज
सीता की रक्षा में,
तूने जान गँवाई
राम को सीता
का
पता दिया
तूने अपना बलिदान दिया (हे राम,
हे राम)
राम-लक्ष्मण आए,
जटायु से मिले
जटायु ने
रावण
का वर्णन किया
सीता लंका गईं
यह खबर
सुनकर
राम
विलाप करते
हैं
(आ आ
आ)
जटायु ने प्राण
त्यागे, राम ने शोक मनाया तूने
अपना बलिदान दिया
जटायु
की वीरता अमर रहेगी
(जय जटायु,
अमर रहे)