

भरत आए अयोध्या,
सुना राम वन गए
कैकेयी को धिक्कारा,
राम की खोज में निकले
जय राम, जय राम,
भरत के प्रेम की मूरत
राम के
चरणों में गिरकर,
भरत ने राम को मनाया
(राम
राम)
राम ने कहा भैया,
पिता का वचन पालन
तुम बिना राज्य का कारोबार संभालो,
मैं वन में तुम्हारा इंतज़ार करूँगा
(ओ
मेरे
भाई)
भरत ने ली पादुका,
अयोध्या ले आए
राम के चरणों की पादुका को
सिंहासन बनाकर, भरत ने राम के
आदेश का पालन किया