

(hehehe) दबे पाँव कान्हा आए,
सखा संग शोर मचाए
मटकी तक हाथ बढ़ाए,
माखन की
खुशबू सुहाए
(शशश... धीरे चलो)
माखन चोर कान्हा आए,
गलियों में मस्ती मचाए
मैया ने पकड़ा, मुस्कान दिखाई,
सारा गोकुल हँसी
में आई
"कान्हा! फिर से माखन
चोरी?"
"मैया,
मैंने तो बस देखा था,
माखन खुद मेरे हाथ में आ गया!" (hahaha)
हँसकर मैया ने गले लगाया,
नटखट को फिर प्यार लुटाया
झूम उठी हैं
गोकुल की गलियाँ,
खिल उठीं सब मन की कलियाँ (कान्हा रे,
प्यारे कान्हा रे)
मैया ने पकड़ा, मुस्कान दिखाई,
सारा गोकुल हँसी
में आई
(जय हो कान्हा की!)