

(ooh, aah) यमुना किनारे कदम
की छइयाँ
खेले हमारे प्यारे कन्हैया
कालिया नाग तू
क्यों यहाँ
आया
विष
का
अँधेरा क्यूँ है फैलाया
कालिया नाग
तू क्यों आया
कान्हा ने तो
तुझे मिटाया
फन पर नाचे दमन किया यमुना को फिर पावन किया (जय कन्हैया
लाल की!)
कूद पड़े कान्हा
यमुना की धारा
थर-थर कांपा वो नाग बेचारा
नन्हे से पैरों
से
ता-ता
थैया
नाचे फनों
पर कृष्ण कन्हैया
कालिया नाग तू
क्यों आया
कान्हा ने तो
तुझे मिटाया
फन पर नाचे दमन किया यमुना को फिर पावन किया (जय कन्हैया
लाल की!)
पावन हुई
यमुना मैया
धन्य हुए
हमारे कन्हैया (जय कन्हैया लाल की!)