

ओ म्हारा रामसा पीर,
थारो नाम
घणो प्यारा, रुणिचा धाम में बाजे नगाड़ा,
भक्तां
रो तू सहारा…
ओ बाबा रामदेव पीरा,
म्हारी सुन ले पुकार,
थारी ज्योत जगाऊँ दिल में,
थां बिन कौन म्हारो यार।
रामसा पीर… रामसा पीर… रुणिचा वाला रामसा पीर!
थारो नाम जपूँ मैं रात-दिन,
बाबा थां ही म्हारी तकदीर!
(रामसा पीर!)
धोरां री धरती पे,
थारो नाम गूंजे, ढोल नगाड़ा बाजे,
भक्तां संग झूमे,
जिको थारी शरण में आवे,
बाबा खाली हाथ ना जावे।
म्हारी चुनरी लाल-लाल,
थारे दर पे
आई,
मन में आस लेके बाबा,
थारी ज्योत जगाई।
ओ रामसा पीर, म्हारा रामसा पीर,
थारो नाम ही सहारो!
रुणिचा धाम रो राजा म्हारा,
थां पे दिल यो वारो!
(रामसा पीर!)
हुकम करो तो रेगिस्तान में,
फूल खिल जावे बाबा,
थारी मेहर पड़ै जद म्हारे
ऊपर, भाग खुल जावे बाबा।
थारे नाम री माला जपता,
सांध्य सवेरै मन, रामदेव पीर म्हारा बाबा,
थां ही म्हारो धन।
रामसा पीर… रामसा पीर… बोलो जय रामदेव पीर!
रुणिचा वाला बाबा म्हारा,
भक्तां री राखो लाज!
रामसा पीर… रामसा पीर… थारो नाम अमर रहसी,
म्हारा बाबा रामदेव पीरा,
दुनिया थांने याद करसी!
(जय हो!)