

(hummmm) गंगा की लहरें पुकारें तुझे
घाटों पे जलती है शाम
धुंधली सी राहें बुलाएँ तुझे
होठों पे अटका है नाम
तू था
उस पार
मैं थी
इस पार
नैया किनारे
बँधी रही
रात हुई हर बार (ahhhh) (ooh)
समय की धारा बहती रही
तस्वीरें धुंधली हुईं
दूरी तो दोनों ने सहती रही
बातें अधूरी रहीं
नाव
किनारे ही खड़ी रही नदी बहती रही
प्यार ज़िंदा रहा