

मंदिर-मस्जिद बाँट रहे हैं,
जाति के झंडे लहरा रहे हैं,
सवाल मगर ये कोई पूछे,
देश को आगे कौन बढ़ा रहे हैं?
जो स्कूलों की बात करेगा,
रोज़गार की राह भरेगा,
जो अस्पताल बना सके वो,
वही असली नेता होगा। ना नाम पे,
ना जात पे, ना ऊँची-नीची बात पे,
देश चलेगा कर्म से,
झूठे नारों से नहीं। सोच समझ के वोट तू देना,
भविष्य अपना मत खो देना,
धर्म नहीं जो पेट भरेगा,
काम ही देश को आगे करेगा। ना नफ़रत की आग जलाओ,
सच्चाई का दीप जलाओ,
जो जनता के साथ खड़ा ho,
उस नेता को आगे लाओ।
युवाओं के सपने टूटे,
कितने घर बेरोज़गारी झेले,
फिर भी लोग लड़ते
दिखते, मजहब के इन झूठे मेले। नेता वो जो दर्द समझे,
किसानों के खेत सँवारे,
जो शिक्षा को हक़
बना दे,
हर बच्चे के सपने निखारे। जब जनता जागेगी,
तभी तस्वीर बदलेगी, जाति-धर्म की दीवारें,
एक दिन खुद गिर जाएँगी। कुर्सी उनकी हिल जाएगी,
जो नफ़रत फैलाते हैं,
देश उन्हीं का होगा फिर,
जो इंसानियत निभाते हैं। वोट कोई मज़ाक नहीं है,
ये देश की आवाज़ सही है,
सोच बदलो, दौर बदलो,
भारत का
भविष्य बदलो!
ना हिन्दू, ना मुस्लिम पहले,
सबसे पहले हम हैं इंसान,
जो देश को
आगे ले जाए, उसी के हाथों दो कमान!
कागज़ का एक छोटा बटन,
बदल सकता है पूरा वतन…
सोच के अब फैसला करना,
देश है अपना… इसे मत बँटना।