

तेरी आहट सी फिर आई है
भीगी रात मुझे बुलाती है
तेरे जाने के बाद भी कमरा तेरा लगता है हर चीज़ में
तेरा चेहरा चुपके से जगता है
खिड़की पे गिरती बूंदों में नाम तेरा मिलता है
मैं जितना भूलना चाहूँ दिल उतना ही रुकता है इस लंबी रात
के अंदर साँसें भारी रहती हैं
तेरी यादें मेरी नींदों पर पहरा बनके बैठी हैं
कह दूँ खुद से तू अब लौटेगा नहीं फिर भी दिल ये
यकीन तोड़ेगा नहीं एक अधूरी सी दुआ होंठों पे है
तू नहीं है पर तेरा होना यहीं तू नहीं फिर भी तू
हर जगह है
मेरी धड़कन में तेरी सदा है रात भर मैं तुझे सोचता हूँ
टूट कर भी ये दिल जुड़ा है
तू नहीं फिर भी तू हर जगह है
मेरी तन्हा सी रूह में बसा है
तेरी हँसी की वो गर्मी अब ठंडी हवा में खोई है
मेरी हथेली की रेखा भी तेरे बिना अधूरी हुई है
मैंने नए दिनों से रिश्ता जोड़ना चाहा था पर हर नए मोड़
पे तेरी याद ही पहली हुई है
आईने में अपना चेहरा भी कुछ अजनबी सा लगता है
जैसे
मुझमें मेरा कम और तेरा ग़म ज़्यादा बसता है अगर ये दर्द
ही आखिर मेरी दवा बन जाए तेरी कमी से ही शायद नया
सवेरा आए मैं रोते रोते भी तुझसे मोहब्बत कर लूँ जो बच
गया है वो दिल फिर से जीना सीख जाए तू नहीं फिर
भी तू हर जगह है
मेरी धड़कन में तेरी सदा है रात भर मैं तुझे सोचता हूँ
टूट कर भी ये दिल जुड़ा है तू नहीं फिर भी तू
हर जगह है
मेरी तन्हा सी रूह में बसा है दर्द मेरा भी अब तुझसे
जुड़ा है
तेरी यादों के साथ ही सो जाऊँ
शायद सुबह में थोड़ा सा भर जाऊँ