

बिखरे ख्वाबों को
समेटता
रहा,
तेरी तस्वीर से बातें करता रहा।
तू तो चली गई मुझे छोड़कर,
मैं तेरी यादों में ही जीता रहा।
तुझे भूलने की कोशिश भी की,
मगर दिल ने मेरी सुनी ही नहीं।
मैं हँसता
रहा
इस ज़माने के संग,
मेरी आँखों ने खुशी देखी नहीं।
बिखरे ख्वाब,
बिखरी रातें,
तुझ बिन अधूरी मेरी मुलाक़ातें।
तू मेरा होकर भी मेरा न हुआ,
दिल रोता रहा, तूने सुना ही कहाँ।
बिखरे ख्वाब, टूटा जहाँ,
ढूँढूँ तुझे मैं जाने कहाँ। तू लौट आए,
बस इतनी दुआ, तुझ बिन मेरा कोई रहा ही कहाँ।
तेरे ख़तों को आज भी पढ़ता
हूँ मैं,
उन लफ़्ज़ों में तुझको ही ढूँढता हूँ मैं।
तू किसी और की दुनिया
में खुश,
मेरी दुनिया तेरी यादों में है।
शिकायत नहीं है तेरे फ़ैसले से,
बस दर्द है अपने ही सिलसिले से।
तुझे चाहकर भी तुझे पा न सके,
हम ख़ुद से भी नज़रें मिला न सके।
बिखरे ख्वाब, बिखरी रातें,
तुझ बिन अधूरी
मेरी मुलाक़ातें। तू मेरा होकर भी
मेरा न हुआ,
दिल रोता
रहा,
तूने सुना ही कहाँ।
बिखरे ख्वाब...
तेरी यादें... ख़ामोश दिल...
अधूरी बातें... तू खुश रहे...
बस यही दुआ...
मैंने तुझे चाहा...
ये मेरी ख़ता?