

(hmmmmm...) कोई पूछे
तुमसे…
कौन हूँ मैंऽऽ…
तुम कह देना…
कोई ख़ास
नहींऽऽ…
इक दोस्त था…
पक्का कच्चा-सा…
इक झूठ था…
आधा सच्चा-सा…
जीवन
का
एक
साथी
था…ऽऽ जो पास होकर
भीऽऽ…
पास नहीं…
एक ख़्वाब था…
टूटा-बिखरा-सा…
एक दर्द था…
मीठा-गहरा-सा…
बारिश की पहली
बूंदों में…
एक आँसू था…
वो ठहरा-सा…
वो एक मौसम था
जो बीत गया…
वो एक वादा था
जो टूट गया…
भीड़ में चलता
साया था
वोऽऽ… जो हाथ से
तेरे
छूट गया…
कोई
पूछे
तुमसे… कौन हूँ मैंऽऽ… (gasp) तुम कह
देना…
कोई
ख़ास नहींऽऽ…
बस…
एक दोस्त था… जो पास होकर भीऽऽऽ… पास नहींऽऽऽ……